Sunday, 3 November 2013

भारत का निर्माण



कभी कोयलों को कुकुकते सुनें हैं आप ? कभी पपीहा के पिहू -पिहू का  
आनंद लिया है आपने ?
क्यों नहीं जरुर इसका हिस्सा बने होंगे आप |
मगर क्या आप को पता है इस काम को पूर्ण करने के लिये इस छोटे से जीव को एक खास समय का इंतजार रहता है उस भांति जैसे एक बच्चे को अपने सपने को  साकार करने का  इंतजार |
जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ अपने देश का जिसका बचपन समाप्त हो चूका है|
वक्त आगया है आसमान में  खुली स्वच्छंद विचरण करने का | जब हमारे देश को 1947 में नया  जन्म   मिला तो उस समय हमारी ताकते काफी कम थी इस कारन दुनिया वाले ले हमें बच्चा कहकर बुलया करते थे |
बुलाए भी क्यों ना, हम अनेक तरह के  असहाय   गतिविधियों में घुले हुए     थे | हम अपने पुराने हथकण्डे को ले कर आगे बढ़ रहे थे | रोटी और माकन हमारे लिये  सरदर्द बना हुआ था |उस समय आधी से ज्यादा आबादी रात में भूखे पेट ,खुले आसमान में  सोने पर मजबुर थे |साथ ही साथ कइ  तरह की बीमारियाँ भी काफी खतरनाक हो चला था |ऊपर से सुरक्षा भी काफी जरुरी विषय बना हुआ था |
मगर इन अब   बातों को नजरअंदाज कर हमारा देश आज युवा देश बन चूका है | आज दुनिया में सबसे ज्यादा युवा कही है  , तो वो भारत में है|
    जिसका हौसला बुलंद है |
मगर ये सर्म की बात है की हमारे युवा आज किसी दुष्ट लोगों के बहकावे में आकार अपने पथ से धीरे -धीरे भटक रहे हैं |  वे आज अतुल्य भारत के सपने को छोर कर असभ्य समाज से जुरते जारहे हैं | वे आज आपस में जात,धर्म के नाम पर बटते जा रहे हैं | कोइ युवा नसा में लगा  हुआ है तो कोइ शिला और मुन्नी में | आतंक के जाल     में भी कइ युवा आसानी से फंसते जारहे हैं | जो देश के लिये काफी  हानी कारक है| 
मगर   हमें हमारे युवा पर पूर्ण भरोसा है की वे अपने  जिम्मेदारियों को समझेगें | वे दिखा   देंगे की उसके पास कितना दम है  | दुनिया के सामने कृतिमान स्थापित करना होगा तभी जा कर अतुल्य भारत का निर्माण हो पाएगा |

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