बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ती लालू प्रसाद यादव जी का रजनीतिक जीवन काफी उतार- चढ़ाव वाला रहा है | जेपी आन्दोलन में शामिल होने के बाद राजनितिक की सीढियाँ चड़ने वाले लालू पहले पहल आम बिहारी जनता में अपना पकर मजबुत किये | और १९९० में सत्ता में आकर राजनीतिक गलयारों में धमक दिखा दीये |मगर सरकार ठीक तरह से नही चल पा रहा था आडवाणीजी के गिरफ्तारी के भजपा ने लालू सरकार से अपना मुह मोर लिया |मगर लालू जी अपना सरकार बचाने में सफल रहे |
वहीं १९९१ के लोक सभा चुनाव में लालू जी ५४ में ४८ सीटें जीत कर तहलका मचा दीये |मगर उसी समय उनके पार्टी "जनता दल" में विभाजन हो गया | जार्ज जी ने अपना अलग दल बना लिये |
उधर विधान सभा का चुनाव भी नजदीक आने वाला था |
वहीं उनके पहले सासन काल से हीं राज्य व्यवस्था चरमराने लगा था |
मगर १९९५ चुनाव में वे फिर चुने गये | अब उनका धमक दुसरे राज्यों में सुनाइ देने लगा |
उसी समय उनके खिलाफ चारा घोटाले का डंका फुटा | मगर उनका दल फिर भी सत्ता में बना रहा वे बस कुछ दिनों के लिये जेल गए | 2004 में उन्हें रेल मंत्रालय मिला | इधर 2005 में राजद का बिहार से विदाई हो गया |२००९ का चुनाव भी उनके लिये कुछ अच्छा नही रहा और वे बस चार सिट जीत पाए|
अक्टूबर २०१४ उनके रजनीतिक को अंत कर दिया क्योंकि उन्हें चारा घोटाले में दोषी पाया गया और प्रावधान के तहद उनका संसदी रद्द कर दिया गया |

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