यह दुनियां काफी विसाल है जीसे आसानी से देखना मुस्किल है | सुरुआत
से हि लोग पुरी दुनियां को देखने कि कोशिश में लगे रहे |पूर्वपासन् काल से लोग इस काम में लगे रहे | वे दुनियां को जानना चाहते थे | इसके लिये
वे लघु स्तर पर बहुत सारे प्रयोग करते रहे | पर उन्हेंपुर्ण सफलता हाथ नही लगा | उस समय मनुष्य काफी कोशिश कर रह थे मगर आपसी सहयोग के अभाव में कुछ नही कर पा रहे थे |फिर भी वे एक ऐसा माध्यम के खोज में लगे रहे
जिससे वे पूरी दुनिया का दुरी कम कर दे | और अपने आप सुविधापुर्ण जीवन के दहलीजपर खड़ा कर दे | १८वी सदी के बाद में दुनियां वाले को सफलता
मिलना सुरु हो गया|
जैसा की पहले लोग बस नजदीकी लोगों से अपनी
बात करते थे या मनोरंजन करपाते थे
उसका आधार बिल्कुल बदल
गया था | अब लोगों के पास दुरसंचार, टीवी
इत्यादी साधन का उपयोग करने लगे थे | पहले से बेनाम इस
प्रक्रिया को संचार नाम दे
दिया गया |जहाँ तक हमारे देश भारत की बात है यहाँ भी नए संचार की सम- संभावना काफी ज्यादा है आज भारत ने हर तरह के संचार के अत्याधुनिक साधन बना लिया हैं |
खास कर न्यू मिडिया ने काफी सहायता प्रदान किया है |
आज
भारत में युवा काफी काफी न्यू मिडिया के संसाधन
उपयोग कर रहे हैं जिससे काफी विकाश हो रहा
है संचार में
वहीं उपग्रह भी कइ सारे बनालिए हैं जो संचार
में सहायता
प्रदान कर रहे हैं |साथ ही साथ तुफान जैसे समय में भी आज संचार अच्छा काम कर रहा है |जैसे हाल में हुए फेलिन तुफान में भी संचार ने अहम भूमिका निभाया |
मगर अब संचार में राजनीतिक दखल काफी बढ़ गया है | खास कर २०१४ के आम चुनाव में संचार अहम भूमिका निभाने जा रहा है | बीजेपी तथा कांग्रेस खास कर चुनवा में इस बार संचार के नए साधन को उपयोग में लाने वाले हैं | इसका सुरुआत भी हो गया है | नरेन्द्र मोदी ने अपने बहुत सारे सभा का संबोधन
संचार के माध्यम से ही किये |वही सत्ताधारी दल कांग्रेस ने हरियाणा के एक रैली में अत्याधुनिक संचार के माध्यम लगे हैं |वहीं "आप" जैसे दल को इतना बड़ा सफलता संचार के उपयोग से ही मिला |
वहीं कुछ राजनीतिक दल संचार का गलत उपयोग भी कर रहे हैं ,उनसे बचने की जरूरत है |
यानि भारत के राजनीति में संचार पूरी तरह घुल गया है |

No comments:
Post a Comment