Thursday, 24 April 2014

सांप्रदायिकता से मोह भंग ,विकास को मिला रास्ता




2014 का चुनाव ज्यों - ज्यों नजदीक आते जा रहा है लोगों  का धरकने बढ़ता ही जा रहा है | तरह - तरह के चर्चाओं का बाजार गर्म है | सब अपना - अपना राय देने में मशगुल है कोइ कुछ बोलता है तो  कोइ कुछ मगर जो भी नेता लोग अपने कार्य में बखूबी लग गए हैं | हर जगह रैली होरहे हैं पुरा देश इस में उलझा हुआ है |कोइ भी इस बार चुकाना नहीं चाहता है | हर कोइ अपने आप को प्रधानमंत्री से कम नहीं समझ रहे हैं | सब अपना अपना दावा ठोक रहे हैं | इस बार छोटे तथा मझोले दल भी अपने आप को कम नहीं समझ रहे हैं |उनका मनाने कुछ भी मगर जनता पुरा आनंद ले रहे हैं |इधर भाजपा ऐसे दावे ठोक रहे हैं जैसा की लगा रहा है की उनका सरकार बन गया | वहीं सोनिया फिर से वापसी के नारे लगा रहे हैं तो  मुलायम और उनके सहयोगी तीसरे विकल्प की बात कर रहे हैं |मगर मोदी और राहुल खासे चर्चा के विषय बने हुए हैं | मोदी युवा तथा विकाश के नाम तालठोक रहे हैं तो राहुल सबको साथ चलने के नाम पर | भाजपा मोदी को जीता ने में कोइकसर नही छोरना नही चाहते हैं |मगर ये सारे राजनितिक दल सांप्रदायिकता को भी नहीं भूल रहे हैं |वहीँ  लगों का मन इन सब बातों से उब चूका है| वे अब विकाश चाहते हैं |वे भी अब अपने जिन्दगी को सुनहरा बना चाहते हैं |वे भी शिक्षित होना चाहते हैं |
हम इसी कड़ी में खजरहो के लोगों से मिले| वहां के लोग सजग हो रहे हैं वे अब अपने अधिकार को समझाने लगे हैं |वे अब किसी भी तरह से नेताओं  के झासे में नहीं आने वाले हैं |हर वर्ग चाहे वो युवा या महिला हर कोइ अब विकाश चाहता है | खजरहो के लोगों का मानना था की वे लोग अब चुनाव में नसा तथा पैसा जैसे लोकलुभावान चीजों से बच रहे हैं | उनका यह भी कहना था की जब इस चुनाव में नेता उनसे मिलने आते हैं तो  वो विकाश की बातें करने पर मजबुर करते हैं वहीँ वे अपना माग़ भी सामने रखते हैं |  विधालय तथा सड़क अच्छे नहीं हैं इस  पिंड में जिसे वो बनवाना चाहते हैं |वहीँ नेताओं का आनाजाना अभी इस चुनाव में लगा ही रहता है | मगर यहाँ के लोगों को इस बार एक अच्छे इमानदार नेता चाहिए जो उनके परेसनियों को सुन सके समझ सके | ये तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा इस पिंड को इस बार कैसा नेता मिला ,और कितना विकाश को रहा है |
फिलहाल ये तो यकीन हो गया है की ये लोग अब सांप्रदायिक 
जैसे असामाजीक बातों से ऊपर उठ चुके हैं तथा अपने आप को
बदलना चाहते हैं ,अपने पिंड को बदलना चाहते हैं इस पिंड को
 बदला चाहते हैं इस देश को विकशित बनाना चाहते हैं |
  

        साक्षात्कार में पुछे गए कुछ सवाल


प्रश्न- आप का नाम क्या है ?
उत्तर – गुरमेल सिंह
प्रश्न - आप इस बार वोट किन बातों पर देंगे ?
उत्तर  – मैं इस बार वोट विकाश के नाम पर दूंगा
प्रश्न - दुसरे पिंड के मुकबले यह पिंड ज्यादा हीं विकशित है इसमे किसका योगदान है ?
उत्तर – जी इसमे NRI का योगदान है सरकार के तरफ से कुच्छ मदद नहीं  मिला
प्रश्न  - इस पिंड में चुनाव के नाम पर गुटबाजी है ?
उत्तर -- बिल्कुल नहीं
प्रश्न - आज नसा  बहुत ही बड़ी समस्या बन कर उभरी है चुनाव में इस पर चर्चा है ?
उत्तर – नहीं, आज 60 %लोग  हमारे पिंड में नसा ले रहे हैं मगर इसका उपाय कोइ राजनितिक दल नहीं कर रहे हैं |
प्रश्न – क्या आप नसा रोकने के कुछ कर रहे हैं ?
उत्तर – कर तो रहे हैं मगर कुछ हो नहीं रहा है |
प्रशन – क्या इस १९८४ दंगे के बारे में चुनावी माहोल है ?
उत्तर – बिल्कुल नहीं |
प्रश्न – क्या चुनाव में सरकार के तरफ से कोइ केम्पेन चलाया जा रहा है आपके पिंड में ?
उत्तर – नहीं अभी तक तो नहीं |
प्रश्न  - क्या आपके पिंड  को किसी चीज की जरुरत है ?
उत्तर – 12 तक विधालय के साथ अच्छे रोड |
जी धन्यवाद |

      

Wednesday, 23 April 2014

बदहाल शिक्षा के कारन



भारत आज दुनियां में हर क्षेत्र में अपना  दम-खम
 रखता है |जहाँ दुनियां भर में सैन्शक्ति में चौथे स्थान पर है वहीं 11 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है | आज विकाश के मामले में दुसरे स्थान पर है | हर ओर आज अच्छा कर रहा है हमारा देश |मगर एक ओर स्थिति जस की तस है अर्थात कहे तो शिक्षा |आज हमारे विधार्थी तो पुरे दुनियां में परचम लहरा रहे हैं मगर वे विदेशों में जाकर पढने को मजबुर है वहीं लगभग 40%अभी भी साक्षर नहीं है |वहीं विश्व के 200 अच्छे कालेजों की सूचि में भारत का एक नही नहीं हैं |देख कर तो यही लगता है शिक्षा अधिकार कानून कागजी ही साबित होगा|
          सीधे तौर पर देखा जाए तो इन सब चीजों के  प्रमुख कारन है सरकारी विधालय में फैले कुव्यवस्था | हकीकत यह है कि आज भी स्कूलों की दशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो पाया है। बहुत सारे स्कूलों में न पर्याप्त कमरे हैं, न पीने के पानी, शौच, ब्लैकबोर्ड, पाठ्यसामग्री आदि की व्यवस्था।यहां तक की बहुत सारे राज्यों में अध्यापकों के हजारों पद खाली हैं| इसी क्रम मैं पंजाब एक गावं चखहकीम गया वहां पर भी कुछ ऐसा ही नजारा मिला देखने को |हालांकी वहां पर शिक्षकों ने सरकार पर आरोप लगाया |यहां पर दो सरकारी विधालय है मगर दोनों हीं बदहाल एक प्राथमिक विधालय दूसरा मध्यविधालय  | जब मैं गया तो देख कर दंग रह गया वहां के बच्चे  विधालय में पढ़ नही रहे थे बल्की खेल  रहे थे | प्राथमिक विधालय में तो बच्चों के बैठने के लिये खुले आसमान थे |वहीं कुछ बच्चे लगनशील नजर दिखे | वहीं कुछ बच्चे विधालय के बहार बैठे थे और उसे समझाने वाला कोइ नहीं था |और तो और 12:30 PM में मध्यानभोजन बनाना ही सुरु हुआ था |वहीं सारे शिक्षक आपस में गप्पे लारा रहे थे| कुछ बच्चे पानी पिला रहे थे शिक्षकों को जबकि इसके लिये अलग से हर विधालय में कर्मचारी रखा गया है |वहीं तस्वीर भी उतारने नही दिया गया था |

मगर यह स्थिति हर जगह की है |वहीं इसके सुधार के उपाय किया जरह है मगर सरकार अभी भी सोए हुए है | ऐसे में नेशनल कोलिशन फॉर एजुकेशन नामक संस्था की ओर से दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने उचित ही केंद्र और सभी राज्यों से पूछा है कि शिक्षकों की भारी कमी की सूरत में किस तरह शिक्षा अधिकार कानून का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। बुनियादी शिक्षा के मामले में सरकारों का रुख छिपा नहीं है। केंद्र ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू तो कर दिया, पर इसके लिए संसाधन जुटाने की चुनौती से सरकारें आंख चुराती रही हैं।दुःख बात है हमारे देश में अभी तीन करोड़ अस्सी लाख बच्चे स्कूली पढ़ाई से वंचित हैं।अर्थात हमें इसे बदलना होगा चकहकीम जैसे गांव सुरुआत करना परेगा |

प्रियंका गांधी और 2014 चुनाव

हर बार की इस बार भी प्रियंका गांधी चुनाव में सक्रिय है | यह बात अलग है की वे अपने राजनीतिक जीवन को बस परिवार तक रकहना चाहती है |  मगर इस बार कुछ समय के उनका नाम भी राजनीति में उछला | मगर वह सीधे तौर पर इस बात को नकार गई | 
मगर कुछ जानकारों का कहना है की अगर वह चुनाव में उतरती तो राहुल से ज्यादा प्रभावी हो सकती थी | 
मगर जो भी उन्होंने काफी ज्यादा ही इस बार विरोधियों पर हमला कर रही है | जीस कारन अमित साह जैसे लोगों के निशाने पर रहीं है | 
बतौर प्रियंका ने विरोधियों पर हमला बंद करने के बजाए और बढ़ा ही दी | उन्होंने रायबरेली में कहा की ,विपक्षी दल भ्रष्टाचार हटाने की बात करते हैं लेकिन उन्हें यह बताना चाहिए कि वे इस बुराई को कैसे हटाएंगे। कांग्रेस ने सूचना का अधिकार कानून देकर यह बताया कि हम कैसे भ्रष्टाचार रोकेंगे। कांग्रेस ने सूचना का अधिकार कानून लागू करके भ्रष्टाचार को रोका।आपके बीच लोग प्रचार करने आते हैं, आप उनसे पूछिये कि विकास के लिए वे क्या कर रहे हैं। उन्होंने आपके लिए क्या किया है। लोग आते हैं, भाषण देते हैं लेकिन आपके लिये क्या करेंगे, यह नहीं बताते।
वे इस दौरान  अपने परिवार की उपलब्धियां गिनाईं और  स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के बारे में पूछा और कहा ‘‘तुम्हें पता है कि तुम्हारे इस कार्यक्रम को अमेठी से राहुल जी ने शुरू किया था। वर्ष 2004 में जब वह सांसद बने तो उन्होंने सोचा कि इसका विस्तार किया जाए। तो इसे अमेठी के साथ रायबरेली में भी फैलाया गया। तब से आप लोगों ने देखा कि कितना विकास हुआ है।’
 ये तो चुनाव परिणाम ही बताएगा की  अपने परिवार और कांग्रेस को सहायता पहुंचती है | यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिये भी चुनौती है |