Monday, 11 November 2013

समाचार



आज संचार की मांग जोरों पर है | क्योंकि यह  संचार नाम के शब्द आज

 हर ओर नया नही रहा है | आज कोइ भी व्यक्ति इससे बच नही पाया है

 चाहे जो हो हर कोइ इसका उपयोग कर रहा है चाहे जिस काम में हो |

मगर समाचार को सुनने की ललक ने लोगों में आज कुछ ज्यादा ही हो 

गया है | शहर से लकर गांव तक हर कोइ समचार के पीछे भाग रहे हैं | चाहे 
उसे समझ में     आते हो या ना आते हो मगर आज लोग सुने बिना नहीं रह 
सकते हैं | चाहे वो घर पर हो या घर से बहार उसे पल -पल कि जानकारी 

चाहिए | हर तरह समचार सुनना वे जरुरी समझते हैं जैसे खेल ,व्यपार

 ,मनोरंजन इत्यादी |
  दूसरी तरफ मिडिया समूह भी लोगों को ध्यान में रख कर कार्य कर रहे हैं 

साथ ही साथ समाचार समूहों की लिस्ट बढ़ते हि जा रहा है    | कुछ लोग 

मासले तरह समचार सुनना पसंद करते हैं तो उसके लिये मसाला पेस 

किया जा रहा है | अगर आप समचार में वाद विवाद देखना पसंद करते हैं

 तो ये भी कुछ समाचार चैनल पेस कर रहे हैं | वहीं घरेलू महिलाओं को 

लुभाने के लिये सास बहु वाले समचार पैकेज तैयार किया जा रहा है |

वहीं मौजूदा नीति के तहत एफएम रेडियो को आकाशवाणी के समाचार

 बुलेटिन को बिना किसी हेरफेर के प्रसारित करने की अनुमति है। खेल,

 यातायात, मौसम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षा, रोजगार, स्थानीय 

निकायों की ओर से की गई सार्वजनिक घोषणाओं से संबंधित समाचार

 प्रसारण करने की भी छूट है।

वहीं आज मोबाइल कम्पनी समचार को अपने व्यसाय से जोर कर खुब

 कमा रहें हैं | क्योंकि अब न्यू मीडिया

का भरमार सा हो गया है | लोग अपने तरीकों से समचार देखते हैं और 

सुनते हैं |

मगर अभी के समय में समाचार का स्तर बुरी तरह से गिरते जा रहा है 

   सीधे अर्थों में अब समचार अब समचार नहीं रहा बल्की मनोंरंजन का 

साधन बन चूका है जो बिल्कुल आधारहींन बन होते जा रहा है |समचार से 

सच्चाइ  धीरे -धीरे गायब होते जा रहे हैं | कारन बिल्कुल साफ है क्योंकि 

मिडिया आज व्यवसाय क रूप ले चूका है |

 हमें इसका विरोध करना चाहिए ताकि हमारे देश की अन्दुरुनी स्थिति 

सही रहे |

हब सब मिल कर काम करें




















बात उस समय कि है जब मैं  १२ वीं क्लास में पढता था | पुरे मस्ती के 

साथ समय गुजर रहा था | मुझे लगता था कि संसार बस इतना सा ही है |

जो मन में आता वही करता   था | बस अपने धुन में लगा रहता था |किसी 

 फिकरमंद आदमी से बिल्कुल परे ,सोच रहीत तथा ज़माने से  दूर |

साधारण सब्दों में कहे ठंढे छाव के तरह था हमारा जीवन |

हम बहुत मेहनत कर रहे थे अपने सपने को पुरा करने के लिये | बस अपने

 देश  को हर चीज में आगें देखना चाहते | खास कर क्रिकेट को अपना धर्म 

समझते थे | जिस दिन मैच होता था उसके पहले रात में ठीक ढंग सो नहीं 

पाते थे | हर समय लगा रहता था पता नहीं कल क्या होगा कौन जीतेगा ,

धोनी का सतक लगेगा या नहीं | इस चक्कर में कइ  बार माँ से डाट भी 

परता |

वहीं राजनीतिक  जैसे चीजे उस  समय हमारे समझ में नही आता था |

बेरोजगारी , महगाई,भ्रष्टाचार जैसे शब्दों से कुछ मतलब नही था |

एक बार कि बात है ,१५ अगस्त नजदीक था मैं अपने दोस्तों के साथ एक 

दुकान पर कुछ खरीद रहा था | तभी मेरा नजर एक ओर जा कर टिक गया |

एक बच्चा जो सकल से गरीब नजर अता था पता नहीं क्यों उसे मैं बार-

बार देखे जा रहा था | मेरा पलक उसे बार - बार निहारे जा  था | मैं बिल्कुल 

हैरान परेसान था | वह बच्चा धीरे - धीरे हमारे ओर ही चले आ रहा था |

भले ही वो मैले कुचले कपरे पहने हो मगर उसके शरीर से एक अलग ही 

तरह का उर्जा निकल रहा था | उसके ललाट से एक तेज निकल रहा था जो

 मुझे बार-बार उसको देखने पर मजबुर कर रहा था | वह धीरे - धीरे कर के 
     
मेरे पास पहुँच गया और अपने मैले कपड़े से १० का घिसा सा नोट निकला 

और दुकानदार से तिरंगा मागां मगर दुकानदार ने झल्लाते हुए   कहा ,  

 इतने कम     पैसों में तिरंगा कहां से होग बेटा और  पैसा लाओ ?

यह बात सुनते ही बेचारा बहुत उदास हो गया और रोने लगा | यह सब देख 

कर मुझे  बहुत बुरा लगा | तत्काल मैने अपने कुछ पैसे मिला कर उसे

 तिरंगा तो खरीद दिया मगर मुझे कुछ बातें सोचने पर मजबुर कर दिया -

जैसे कि हमारे देश में इतना गरीबी क्यों है ?

बरोजगारी क्यों नहीं कम हो रहा है ?

महगाई क्यों बढ़ते जा रहा है ?

क्या इन सब चीजों से हमारे देश को निजात मिलेगा ?

जरुर मिलेगा जब हब  सब मिल कर इसके खिलाफ काम करें |












GANDI BAT


आज भारत के युवा  गंदी बात में लगे हुए हैं |जो काफी गलत है बात है

 यानीं वे अपने आप को गलत दिशा में ले

जा रहे हैं | वे खुद को आज बस फुहर गानों तक सिमित कर देना चाहते हैं | 

वे अपने आप को भूलते जा रहे हैं |

ना ही उसे देश का फिक्र ना समाज का | वे इस दरिन्दे दुनियां में खोते जा 

रहे हैं | उसे पता नही यह दुनियां काफीला का    बगीचा है जहां लोग आते हैं 

और चले जाते हैं | बस बच जाता है तन्हाई और कुछ नहीं | यानि बस 

अन्धकार ही अंधकार प्रकाश क कोइ नमो निशान तक नहीं | हर  दरवाजे   

बंद हो जाते हैं निकलने का कोइ रास्ता नहीं बचता है | बस गुमनामी का 

एक हल्की सी रौशनी बची रहती है ,ऐसा गुमनामी जो हमारे देश को फिर 

से बेघर बना सकता है | हम फिर से 1970-1980 वाले स्थिति में जा सकते

 हैं | जहां हमारे लिये कुछ नहीं बचा था | बचा था तो बुख बेरोजगारी , 

नाकामी ,खून -खराबा | आज फिर हमारे युवा इसी राह पर चल परे हैं |

विदेशों हम दावा करते हैं की हम अब युवा देश बन गए हैं | कहते हैं कि हम

 अब इतिहास रचने के कगार पर हैं ,हमारा युवा काफी मेहनती जो किसी 

भी सफलता को छू सकते हैं | हम सुपर पवार बनाने के ओर अग्रसर हैं |  

हमारे युवा यूरोपीयन देशो को आसानी से पीछे छोर सकते हैं ,मगर ये बस 

कागजों की  बात है जहां पर हमारे चटोर नेतागन बड़े - बड़े दावे किया 

करते हैं | वहीं देश के बजट में  भी वोट बैंक छाया रहता है युवाओं पर 

ध्यान नही दिया जाता है | यही कारन है की भरी भरकम युवा फौज होने के 

बाबजुद हम ओलंपिक जैसे खेल में पीछ छुट रहे हैं वहीं उच्च संस्थानों का 

अभाव भी युवा के विकाश पर असर पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं |

मगर फिर भी हमारे कुछ युवा IT सेक्टर में काफी अच्छा काम कर रहे हैं 

जिससे देश का नाम काफी अच्छा हुआ हैं | मगर हर सेक्टर में उत्थान 

जरुरी है तभी देश आगे बढ़ेगा | युवा को गंदी बातों को छोरना परेगा |

Sunday, 10 November 2013

जीत जनता का


2014 का चुनाव ज्यों - ज्यों नजदीक आते जा रहा है लोगों का धरकने 

बढ़ता ही जा रहा है | तरह - तरह के चर्चाओं का बाजार गर्म है | सब अपना - 
अपना राय देने में मशगुल है कोइ कुछ बोलता है तो  कोइ कुछ 

मगर जो भी नेता लोग अपने कार्य में बखूबी लग गए हैं | हर जगह रैली हो

 रहे हैं पुरा देश इस में उलझा हुआ है |

कोइ भी इस बार चुकाना नहीं चाहता है | हर कोइ अपने आप को प्रधानमंत्री

 से कम नहीं समझ रहे हैं | सब अपना अपना दावा ठोक रहे हैं | इस बार 

छोटे तथा मझोले दल भी अपने आप को कम नहीं समझ रहे हैं |

उनका मनाने कुछ भी मगर जनता पुरा आनंद ले रहे हैं |

इधर भाजपा ऐसे दावे ठोक रहे हैं जैसा की लगा रहा है की उनका सरकार 

बन गया | वहीं सोनिया फिर से 

वापसी के नारे लगा रहे हैं तो  मुलायम और उनके सहयोगी तीसरे विकल्प 

की बात कर रहे हैं |

मगर मोदी और राहुल खासे चर्चा के विषय बने हुए हैं | मोदी युवा तथा 

विकाश के नाम पर ताल ठोक रहे हैं तो 

राहुल सबको साथ चलने के नाम पर | भाजपा मोदी को जीता ने में 

कोइकसर नही छोरना नही चाहते हैं | 

कांग्रेस अभी राहुल को उम्मीदवार नहीं घोषित किये हैं |

बात जो भी हो मगर २०१४ परिणाम में ही पता चलेगा जनता किसके साथ

 है क्योंकि जीत जनता का ही होने 

वाला है |

कारोबार बना आस्था




आज आस्था कारोबार का रूप ले चूका है | हर ओर आस्था के नाम पर नंगा

 नाच हो रहा है | हर कोइ आस्था के नाम पर अपना रोटियां सकने में लगे हैं

 | चाहे वो बाबा लोग हो या राजनितिक दल हर कोइआस्था में अपना 

कारोबार कर रहे हैं | उन्हें इस कार्य में जरा सा भी सर्म नही लग रहा है | वे 

इस चक्कर में धर्म को भी बदनाम कर रहे हैं | वे  कद्र करना भूल चुके हैं 

आस्था को , वे बस खुद के बारे में सोचते जा रहे हैं | आस्था से  निकलने

 वाली हर तरंग आज  विमुख हो चूका है |उसमे अब पहले वाला धार नहीं 

बचा जो लोगों के अंदर जोस जगाया करता था |आस्था से निकालने वाला प्रकाश भी अब बुझ सा गया है |

इन सब का कारन है कारोबार|कुछ साल पहले लोग  घंटों अपना समय

 पूजा-पाठ में बिता दिया करते  थे । मगर अब इन अंधविश्वासों और 

आडंबरों को तर्क की दृष्टि से देखने की नई आदत लग गइ  है। हालांकि 

ईश्वर में आस्था अब भी बरकरार है, लेकिन धर्म-स्थलों पर व्याप्त 

बुराइयों से  लोगों का मन दुखी हो जाता है।

इन जगहों पर बस ये अब बातें घुमती रति है ,चप्पल ठीक से रखो; कहीं

 यह आदमी हमें ठग तो नहीं रहा; पंडितों के चक्कर में मत पड़ो, वरना 

जेब खाली हो जाएगी; आमतौर पर इतनी गंदगी, मानो कोई कचरा घर 

हो; दर्शन के लिए लाइन में खड़े-खड़े हालत खराब आदि।

होटल में रुकने का किराया दिन और भीड़ के हिसाब से तय किया जाता 

है। शनिवार और रविवार को छुट्टी का दिन होने की 

वजह से ज्यादा दर्शनार्थी जुटते हैं, सो उस दिन कमरे के लिए मोटी 

रकम 

चुकानी पड़ती है। गया का विश्व प्रसिद्ध 


मंदिर हो या बौद्धों की सबसे पावन-भूमि बोध गया, कमाई के लिए तरह-

तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। खासकर विदेशी 

पर्यटकों से छोटी-छोटी चीजों के लिए मनमानी रकम वसूली जाती है।

कारन साफ है आज हर तरह के व्यवसाय आस्था से जुर चूका है | 

मगर अभी भी समय है इसे ठीक करने का हम चाहे तो इन सब बुराइयों को 
भगा   कर अपने धर्म को 

बचासकते  हैं | इसका सुरुआत हम युवावों को करना परेगा क्योंकि हैं की 

युवा बढेगा तो देश बढ़ेगा 

क्योंकि यह जरूरत है आपका



रोज  होगा      दिवाली 

रोज जलेगें दीये ,

रोज सजेगा फुल का तली ,

रोज मनेगी खुशियाँ ,

रोज बच्चे करेगे करलव ,

रोज बहेगी  प्रेम की गंगा 

रोज चलेगा नया लहर |

                                          क्योंकि यह जरुरत है इस देश का ,

                                        क्योंकि यह जरूरत है इस समाज का 

                                     क्योंकि यह जरुरत है युवक का 

                                     क्योंकि यह जरूरत युवती का 

                                        क्योंकि यह जरूरत है हर नगरिक का

                                     क्योंकि यह जरूरत है आपका 
 आपका ----नवनीत 













बदलो भारत




सड़कों पे लोगों  को  बिलखते देखा है,



इसी भारत में  में अनाजों को गोदामों में सड़ते देखा है,

लोगों को  को पानी के लिये तरपते  देखा है,




इसी भारत  पाइपों से पानी को बहते देखा है,

भारत को नेताओं से  लुटते देखा है,




 युवाओ को रोजगार के लिये  भटकते देखा है,

 खुले आसमां में लोगों को ठण्ड में तड़पते देखा है,




 नेताओं के खाली पड़े बंगलों में ताला लटकते देखा है,

  इसी भारत में  लोगों को मरते देखा है,




इसी भारत में  सड़कों पे  भ्रस्टाचार देखा है|


समय है समाज बदलने बदलो, 

सोच बदलने बदलो, 

विकाश करो ,

खुद को बदलो ,

और बदलो भारत 
  

-------नवनीत अमर 






हिफाजत में राजनीति




आज हिफाजत में राजनीति की सुरुआत हो चुकी है |एसपीजी यानी विशेष

सुरक्षा समूह की निगहबानी मुहैया कराने की मांग राजनीतिक रंग ले 

   चुकी है। हर राजनितिक दल `इसमे कूद परे हैं |इधर भाजपा का तर्क है


उन्हें उपलब्ध कराई गई सुरक्षा-व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इस पर कांग्रेस 

का तर्क है कि नियम के मुताबिक मोदी को माकूल सुरक्षा इंतजाम 

मुहैया 

कराया गया है। नियम के मुताबिक एसपीजी सुरक्षा केवल प्रधानमंत्री,

 पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को दी जाती है। इसी के तहत 

सोनिया गांधी,राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को यह सुरक्षा मुहैया कराई

 गई है। विचित्र है कि राजनेताओं की सुरक्षा-व्यवस्था पर खर्च को लेकर

 सर्वोच्च न्यायालय कई बार सवाल उठा चुका है, पर उन्हें हथियारबंद घेरे

 में चलने और इसके जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की इस कदर 

आदत पड़ चुकी है कि वे अपने लवाजमे का आकार बढ़ाने की ही सोचते

 हैं। मोदी को जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध है। इसके अलावा मुख्यमंत्री होने

 के नाते उनके साथ गुजरात पुलिस के अधिकारियों-सिपाहियों का बड़ा 

दस्ता भी हमेशा साथ चलता है। मगर फिर भी उन्हें खतरा महसूस हो 

रहा है! 


बात जो भी हो  हिफाजत के नाम सस्ती राजनीति नहीं करनी चाहिए |

हम जानते हैं कि भारत के पुलिस अब ज्यदा ही सक्रिय हो हैं |जैसा की 

हाल के दिनों में बहुत सारे आतंकवाद से  जुरे लोग  पकरे गए हैं | अगर 

अगर जरुरत परा तो हर तरह से हिफाजत कीया जाएगा | इसमे इतना 

राजनीति करने की काया जरुरत है  

लालू यादव



बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ती लालू प्रसाद यादव जी का रजनीतिक जीवन काफी उतार- चढ़ाव वाला रहा है | जेपी आन्दोलन में शामिल होने के बाद राजनितिक की सीढियाँ चड़ने वाले लालू पहले पहल आम बिहारी जनता में अपना पकर मजबुत किये | और १९९० में सत्ता में आकर राजनीतिक गलयारों में धमक दिखा दीये |मगर सरकार ठीक तरह से नही चल पा  रहा था आडवाणीजी के गिरफ्तारी के भजपा ने लालू सरकार से अपना मुह मोर लिया |मगर लालू जी अपना सरकार बचाने में सफल रहे |
वहीं १९९१ के लोक सभा चुनाव में लालू जी ५४ में ४८ सीटें जीत कर तहलका मचा दीये |मगर     उसी समय  उनके पार्टी "जनता दल" में विभाजन हो गया | जार्ज जी ने अपना अलग दल बना लिये |
उधर विधान सभा  का चुनाव भी नजदीक आने वाला था |
वहीं उनके पहले सासन काल से हीं राज्य व्यवस्था चरमराने लगा था |
   मगर १९९५ चुनाव में वे फिर चुने गये | अब उनका धमक दुसरे राज्यों में सुनाइ देने लगा |
 उसी समय उनके खिलाफ चारा घोटाले का डंका फुटा | मगर उनका दल फिर भी सत्ता में बना रहा वे बस कुछ दिनों के लिये जेल गए | 2004 में    उन्हें रेल मंत्रालय मिला | इधर 2005 में राजद का बिहार से विदाई  हो गया |२००९ का चुनाव भी उनके लिये कुछ अच्छा नही रहा और वे बस चार सिट जीत पाए|
अक्टूबर २०१४ उनके रजनीतिक को अंत कर दिया क्योंकि उन्हें  चारा घोटाले में दोषी पाया गया और प्रावधान के तहद उनका संसदी रद्द कर दिया गया |

संचार और 2014चुनाव



यह दुनियां काफी विसाल है जीसे आसानी से देखना मुस्किल है | सुरुआत से हि लोग पुरी दुनियां को देखने कि कोशिश  में लगे रहे |—पूर्वपासन् काल से लोग इस काम में लगे रहे  | वे दुनियां को जानना चाहते थे | इसके लिये वे लघु स्तर पर बहुत सारे प्रयोग करते रहे | पर उन्हेंपुर्ण सफलता हाथ नही लगा | उस समय मनुष्य काफी कोशिश कर रह थे मगर आपसी सहयोग के अभाव में कुछ नही कर पा रहे थे |——फिर भी वे एक ऐसा माध्यम के खोज में लगे रहे जिससे वे पूरी दुनिया का दुरी कम कर दे | और अपने आप सुविधापुर्ण जीवन   के दहलीजपर खड़ा कर दे |  —१८वी सदी के बाद में दुनियां वाले को सफलता मिलना सुरु हो गया|
—जैसा की पहले लोग बस नजदीकी लोगों से अपनी बात करते थे या मनोरंजन करपाते थे
 उसका आधार बिल्कुल बदल गया  था | अब लोगों के पास दुरसंचार, टीवी इत्यादी साधन का उपयोग करने लगे थे | पहले से बेनाम इस
  प्रक्रिया को संचार नाम दे दिया गया |जहाँ तक हमारे देश भारत की बात है यहाँ भी नए संचार की सम- संभावना काफी ज्यादा है आज भारत ने हर तरह के संचार के अत्याधुनिक साधन बना लिया हैं |

—खास कर न्यू मिडिया ने काफी सहायता प्रदान किया  है |
—आज  भारत में युवा काफी काफी न्यू मिडिया के संसाधन
—उपयोग कर रहे हैं जिससे काफी विकाश हो रहा है संचार में 
—वहीं उपग्रह भी कइ सारे बनालिए हैं जो संचार में सहायता
—प्रदान कर रहे हैं |—साथ ही साथ तुफान जैसे समय में भी आज संचार अच्छा काम कर रहा है |जैसे हाल में हुए फेलिन तुफान में भी संचार ने अहम भूमिका निभाया |
  मगर अब संचार में राजनीतिक दखल काफी बढ़ गया है | खास कर २०१४ के आम चुनाव में संचार अहम भूमिका निभाने जा रहा है | बीजेपी तथा कांग्रेस  खास कर चुनवा में इस बार संचार के नए साधन को उपयोग में लाने वाले हैं | इसका सुरुआत भी हो गया है | नरेन्द्र मोदी ने अपने बहुत सारे सभा का संबोधन 
 संचार के माध्यम से ही किये |वही सत्ताधारी दल कांग्रेस ने हरियाणा के एक रैली में अत्याधुनिक संचार के माध्यम लगे हैं |वहीं "आप" जैसे दल को इतना बड़ा सफलता संचार के उपयोग से ही मिला |
  वहीं कुछ राजनीतिक दल संचार का गलत  उपयोग भी कर रहे हैं ,उनसे बचने की जरूरत है |
   यानि भारत के राजनीति में संचार पूरी तरह घुल गया है |



समाज का निर्माण


आज पुरा संसार आपसी खिचड़ी में फसा हुआ है | हर जगह कोहराम मचा हुआ है | हर जगह बुरा हो रहा है ,लगता है संसार से सुख नाम का शब्द ही     मिट गया हो | कहने के लिये तो दुनियां में  आज  हर तरह के    सुविधाएं
व्याप्त है मगर सच्चाई कुछ और ही है | अरब से लेकर अफगान तक ,कश्मीर से लेकर बिहार तक हर जगह त्राहिमाम मचा हुआ है |लोगों के मन में भय का वातावरण बना हुआ है ,जो  आगें चल कर घातक हो सकता है | लोगों का कुटुम्भ है नस्ट      होने  के कगार पर है | लोग  अपनों को खोते ज रहे हैं साथ ही साथ इस दुनियां से अपनापन  भी धीरे -धीरे ख़त्म होते जा रहा है |कुछ दरिंदे  चंद पैसों के   लिये अपना ईमान तक बेच रहे हैं |

जो भी हो इन  सब के पीछे घिनौने रजनीति है | चाहे जो भी देश हो या जो भी राज्य हो हर जगह आज    विकृत राजनीति हो रहा है |    कुछ राजनीतिक घराने अपने फायदे के लिये इस प्यारे धरती      को                       लहूलुहान कर रहे हैं | इन सब से बचारे आम जनता को तकलीफ उठाना     पर रहा है |

अगर  युवा चाहे तो आज अच्छा समाज का  निर्माण कर सकते हैं | ऐसा समाज    जिसमे बस अमन ,चैन ,शुख -शांति ,सादगी के अलावा   कुछ   नहीं हो | हर ओर बस प्यार ही प्यार हो , हर धर्म का सम्मान हो | लोगों के मन में सच्चाई की ललिमा चहक उठे | देखने में हमारा दुनियां जन्नत से भी प्यारा लगे |

   



  

Tuesday, 5 November 2013

सभ्यता


यह संसार विमुख तरंगों कि छाव है | जो अपने अन्तरंग में विभिन्न तथा दुर्लभ वस्तुओं कि प्रणाली को छुपाए हुए है | अर्थात संसार के सारे तथ्य हमारी   प्राचीन रंग -बिरंगे सभ्यता     तथा संस्कृति को समय -समय पर 
 सींचते रहे  हैं | इस प्रक्रिया के  कारन हमारा सरल ,संसारिक क्रिया-कलाप फलता -फूलता रहा है | 
सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे सामने जो सभ्यता व्याप्त है उसका उत्थान कहा हुआ ?
दुनियां वाले    सभ्यता कहां सीखी ?
बड़े गर्व कि बात है की सभ्यता का संबध हमारे  मातृत्व से रहा है | 
अर्थात प्राचीन काल से ही भारत, सभ्यता तथा संस्कृति का मुख्य केंद्र रहा है | भले ही समय -समय पर हमारी संस्कृति को दबाने का प्रयास किया गया हो मगर वे अपने दिव्य रौशनी से हमेसा हमें   प्रकाशवान करती रही
 है | इसी प्रकाश को आंतरिक रूप से ग्रहण करके हमारी अभिलाषा 
जीवंत रहा है | अर्थात हम अपने सतरंगी सभ्यता कि  चादर ओढ़ कर सत्य कि स्थापना हेतु उत्कृष्ट मार्ग कि ओर अग्रसर रहे हैं | 
यानी हम कह सकते हैं की हमारा शरीर सकारात्मक व सहजता से गुथा हुआ है जो समाज तथा देश के कल्याण के वास्ते हर वक्त न्योछावर है | मगर २१वीं सदी  कि व्यवस्था हमारी   संस्कृति पर आतंरिक रूप से चोट पहुंचा रहा है | 
  खास कर कर राजनीतिक व्यवस्था | ये  हर व्यवस्था को अपने कुचक्र से प्रभावित करने क लगातार प्रयास कर रही है | कुचक्र इतना   ताकतवर तथा समुंद्री तूफान कि तरह है जो अन्याय था असत्य को पुष्ट करते जा रहा है |     जो हमारे धरती के सुंदर रंगों को बेरंग कर सकते हैं | 
मगर हमारा विश्वास है कि सत्य कि ही एक दिन जीत होगी | 
धरती पर फैलने वाले असत्य ,भ्रष्टाचार ,अन्याय और  असामाजिकता एक दिन प्रास्त होगा | 

Monday, 4 November 2013

चौमुखी विकाश



भारत हमेसा से एक आदर्शवादी देश रहा है | मगर इस देश में राजनितीक उथल - पुथल होता ही रहता है | आजादी के बाद   भारत ने काफी तेजी से      विकाश किया है मगर अंदर की तस्वीर कुछ और है | कहने को तो हम आज ताकतवर देश हैं मगर बर-बार छोटे    देशों से सैन्य चुनौतियाँ मिलता ही रहता है।११ वीं सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था   भी हमारे पास है मगर गरीबी  घटने का नाम नही ले रहा है | महगांई  तो दिन दुन्ना रात चौगुन्ना किये हुए है | और जनसंख्या तो हम दो हमारे दस के हिसाब से बढ़ रहा है | 
एक    ओर हम अपना पीठ थपथपा रहे हैं तो दूसरी ओर नाकामी कि गाथाए लिखते जा रहे हैं | 
यह बात सुन कर ख़राब जरुर लगेगा और आप हमें अपनी सफला गिनाने 
लगेंगे | आप हमें बताएगें की आज भारत काफी तरक्की कर लिया है | हर और सफलता के झंडे गार  रहे हैं  चाहे वो खेल हो या विज्ञानं या मनोरंजन |खेल में हमने वल्ड्कप जीता, विज्ञान में हम मंगल पर जा रहे हैं, मनोरंजन में हम हाल के दिनों में काफी वहा -वाही लुटा है | 
ये सच है की भारत विकाश किया है लेकिन ऐसा विकाश किस काम का | 
सुरुआत खेल से करते हैं | आज भारत के ख़िलाड़ी दर -दर भटक रहा है | अपने नाम के लिये क्योंकि बहुत सारे भारतीये खेलसंस्था  का  मान्यता रद्द कर दिया गया है | वहीं        हॉकी    जैसे  खेलों का स्तर दिनों दिन घटते जा रहा है | फुटबॉल में हम नेपाल जैसे देशों  से भी पीछे हैं | वहीं ओलंपिक जैसे  खेलों के खिलाड़ी अभावों से ग्रस्त है | बड़े सर्म  कि बात है, हर ओलंपिक में इतने बड़े देश को बस एक या दो मेडल से सांतोष करना परता है | बस चंद देशों में खेलेजाने वाले क्रिकेट  में जितना मेरे हिसाब कोई बड़ी बात नहीं  है | 
विज्ञान का तो बात ही छोर दीजिये आज भी हमारे देश को   दूसरे देशो से उपकरण आयात करना पड़ता है जिसमें हमारे देश का बहुत सारा धन विदेश चला  जाता है  | छोटे - छोटे समानों के लिये आज भी चीन और जापान पर निर्भर रहना परता  है | आज भी किशान पुराने यंत्र का इस्तेमाल कर  रहे हैं | वही नॉबेल प्राइज से हम हर बार चुक जाते हैं | 
मनोरंजन में हम काफी पीछे छूटते जा रहे हैं |    हर हमेसा चोरी का आरोप लगते रहता है | हमारा  मनोरंजन जगत हर वक्त हॉलीवुड के कॉपी में लगे रहते हैं |    इसी          कारन हमारी फिल्में ऑस्कर में   ओंधे मुहं गीर   जाता है | 
अतः हमें किसी एक ओर नही जना चाहिये | हमारे देश का चौमुखी विकाश जरूरी है | इसके लिए हमें आपस में मिल जुल कर काम करना होगा | 
-----आपका नवनीत
| 









Sunday, 3 November 2013

भारत का निर्माण



कभी कोयलों को कुकुकते सुनें हैं आप ? कभी पपीहा के पिहू -पिहू का  
आनंद लिया है आपने ?
क्यों नहीं जरुर इसका हिस्सा बने होंगे आप |
मगर क्या आप को पता है इस काम को पूर्ण करने के लिये इस छोटे से जीव को एक खास समय का इंतजार रहता है उस भांति जैसे एक बच्चे को अपने सपने को  साकार करने का  इंतजार |
जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ अपने देश का जिसका बचपन समाप्त हो चूका है|
वक्त आगया है आसमान में  खुली स्वच्छंद विचरण करने का | जब हमारे देश को 1947 में नया  जन्म   मिला तो उस समय हमारी ताकते काफी कम थी इस कारन दुनिया वाले ले हमें बच्चा कहकर बुलया करते थे |
बुलाए भी क्यों ना, हम अनेक तरह के  असहाय   गतिविधियों में घुले हुए     थे | हम अपने पुराने हथकण्डे को ले कर आगे बढ़ रहे थे | रोटी और माकन हमारे लिये  सरदर्द बना हुआ था |उस समय आधी से ज्यादा आबादी रात में भूखे पेट ,खुले आसमान में  सोने पर मजबुर थे |साथ ही साथ कइ  तरह की बीमारियाँ भी काफी खतरनाक हो चला था |ऊपर से सुरक्षा भी काफी जरुरी विषय बना हुआ था |
मगर इन अब   बातों को नजरअंदाज कर हमारा देश आज युवा देश बन चूका है | आज दुनिया में सबसे ज्यादा युवा कही है  , तो वो भारत में है|
    जिसका हौसला बुलंद है |
मगर ये सर्म की बात है की हमारे युवा आज किसी दुष्ट लोगों के बहकावे में आकार अपने पथ से धीरे -धीरे भटक रहे हैं |  वे आज अतुल्य भारत के सपने को छोर कर असभ्य समाज से जुरते जारहे हैं | वे आज आपस में जात,धर्म के नाम पर बटते जा रहे हैं | कोइ युवा नसा में लगा  हुआ है तो कोइ शिला और मुन्नी में | आतंक के जाल     में भी कइ युवा आसानी से फंसते जारहे हैं | जो देश के लिये काफी  हानी कारक है| 
मगर   हमें हमारे युवा पर पूर्ण भरोसा है की वे अपने  जिम्मेदारियों को समझेगें | वे दिखा   देंगे की उसके पास कितना दम है  | दुनिया के सामने कृतिमान स्थापित करना होगा तभी जा कर अतुल्य भारत का निर्माण हो पाएगा |

Saturday, 2 November 2013

दीपावली में अच्छाइयों का धमाका

दीपावली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है । 

रोशनी का पर्व याद दिलाता है हमें ,अंधकार पर प्रकाश कि जीत 

का | हम खुशहाल लालीमा को अपने आप में समेटने का सफल 
प्रयास  करते हैं | अपने रूह को प्रकाश में  भिगोंकर , लक्ष्मी देवी 

को नमन करते हैं | सारे पुराने ग़मों को भुला देते हैं और नए 

जीवन का ऐलान करते हैं | 

मगर आज जिंदगी कुछ और हो गया है | बस हम अपने आप में 

खोते जा रहे हैं | " बस हम और हमारा परिवार " यही सब कुछ 

हो गया है | आज हम अंधकार में धीरे - धीरे डूबते जा रहे हैं ,

जो समुचा भारत को अंधकारमय कर सकता है | जरा देखीये  तो

 , एक ओर जहाँ दीपावली मन रहा है वहीं दूसरी ओर लोगों के 

पास घर में एक बल्ब जलाने के पैसे नही है | कहीं मिठाई परोसा 

जा रहा है तो कहीं लोगों को एक वक्त का खाना तक नसीब     

नहीं होता है | आज पुरे भारत में दीये जलाए जा रहे हैं तो इसी 

धरती पर धमाकों में मरे लोगों का चिता जल रहा है| कहीं 

महिलाओं को देवी मान जा रहा है   मगर कहीं इसी देश में 

उसका चीरहरण हो रहा है | कहीं सभ्य समाज का गठन हो रहा 

है तो कहीं पर असभ्यता काफी बढ़ गया है | कोइ प्यार फैला रहा  

 है तो कोइ नफरत | 


मगर अभी भी देर नही हुआ है हम सब अपने आप  को बदल 

सकते हैं | हम सब चाहे तो देश में फैले सारे गंदगी का दूर  भगा 

सकते हैं | क्योंकि देश को साफ - सुथरा कर रंग लगाने की जरुरत

है ताकी  हमेसा प्रकाशवान रहे | आज रौशन करने की  जरूरत है 

उस घर को जो   हमेशा से रौशनी से दूर रहा है | 


तो आइये इस बार दीपावली में कुछ नया करते  हैं | मुझे पता 

है आप और हम मील जाए तो देश में कर सकते हैं  


अच्छाइयों  का  धमाका   



Wednesday, 30 October 2013

भारतीय संस्कृति में अमेरिकी राजनीति

 हम जानते है की भारत के महान संस्कृति ने  पूरी दुनिया को मार्ग दिखाया है |  इसी कारण वश प्राचीन समय से ही दुनिया वाले इस विषय के बारे में आन्तरिक ज्ञान सम्र्हित करने की कोशिश करते रहे है|इतना  ही नही इस विषय पर कई बार शोध भी हो चुके   हैं परन्तु सम्पूर्ण सफलता हाथ नही आया |इसी  क्रम में  अमेरिका में लगभग २० सालों से  चल रहे  हिन्दू धर्म तथा  भारतीय संस्कृति के उपर  शोध      अब पूरा हुआ |  इसे विश्वकोष का रूप दे दिया गया| और नाम रखा गया हन्दू धर्म विश्वकोष |दुनियां भर के लगभग १००० विद्वानों तथा  अनुसंधान कर्ताओ के समस्त प्रयास से हन्दू धर्म विश्वकोष तैयार हुआ |यह विसलकाय विश्वकोष ११ खड़ो तथा सात हजार प्रविष्टियों में उद्धृत है| इसे इंडियन हेरिटेज रिसर्च phaunddesan द्वारा प्रकाशित कराया गया  है|स्वामी चिदानंद सरस्वती ने काफी सहयोग दिया|सम्पादक का कार्य डा .के एल शेष गिरी राव ने किया |
भले ही नामकरण हिन्दू धर्म की और इसारा करता हो मगर इससे  हर धर्म का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है|इसमे भारत की महान आध्यात्मिक संस्कृति के  स्वरूप का वर्णन   किया गया है|ये  महज  विश्वकोष के सीमांकन मात्र नही है बल्कि हमारे लाखों वषों  पूर्व के इतिहास के बारे में बतलाता है|अर्थात हम अपने कला-संस्कृति,नाट्यकला ,रजनीति ,दर्शन का ज्ञान पाप्त कर सकेगे |इसमे भारतीय प्राचीन परम्पराएं भी समाहित है|समस्त मनुष्य के रहन –सहन, विचार-व्यवहार  के बारे में भी   जानकारी प्राप्त की जा सकती है |यानि प्राचीन समय के विशुद्ध  प्रमाणिक संग्रह का सारतत्व है|
हालांकि शरु से भारतीय संस्कृति दुनियां  में  शान्ति   की अस्थापना का पुर जोर कोशिश करता रहा है | मगर दुनिया में तांडव का अंकुरण सहस्त्र साल पहले ही शुरू होगाया था |अपने शर्मशिल्ता से भागने वाले लोग हमेशा  से इस अंकुरण को कटुता रूपी जल से सीचते आये  है |आज हम विध्न्सता की ओर चक्र के तरह बढ़ रहे हैं जो विश्वव्यापी    संघर्ष  पैदा कर सकता है|इसके कारन सही है क्योकि हमारे  पास संस्कृति तथा सभ्यता का संगृहीत ज्ञान नही था |लेकिन अब हम हिन्दू धर्म विश्वकोष के माद्यम से अपने आप को -अपने संस्कृति को भली भांति  समझ सकते है फलस्वरूप दुनियां के अटल फलक पर विज्ञानसम्मत व्यापक सत्यापन  दिखेगा|
मगर कुछ बातें  सोचने पर बजगुर करता है की आखिर ये सारा काम विदेश में क्यों पूर्ण हुआ ?
जबकी हमारे भारत देश के पास हर तरह का अत्याधुनिक संसाधन मौजुद है जो  शोध  के लिए मिल का पत्थर बन सकता है | वहीं हिन्दू धर्म से जुरी हर तरह ज्ञान का   उल्लेख  भी प्राप्त हो जाता |मगर शोध का  काम यहाँ से कोशों दूर अमेरिका में क्यों हो रहा था ,भारत में क्यों नही ? क्या भारत में धन की कमी है या बात कुछ और है जरुर कुछ और बात है  , क्योंकी हम जानते हैं भारत दुनियां  का सबसे  ज्यादा उभरता हुआ बाजार है | अमेरिका का इस पर नजर है और वह दुसरे देश को आगे नही बढ़ने देते |यानी वह भारत में पाव ज़माने के लिए कुछ भी कर सकता है |यही कारन है कि अमेरिका यहाँ के सभ्यता और संस्कृति में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है ताकी यहां के   राजनीतिक व्यवस्था में वे  (अमेरिका ) हस्तक्षेप कर सके और अपना फायदा निकाल सके |
हमें इसका विरोध करना होगा


Monday, 28 October 2013

YOUNG INDIA




We know that  even after so many years india still lies in it’s decade old civilization and their system. India as known through out the world is still bounded with old regulations and traditions. Like, donating all your hard earn money and gold into temples, black magic, wizcraft, and many others included. And these are the main factors that resist the development of the country , directly or ultimately.
The potential of this country lies in the youth, the youth that I hard working and full of zeal. They can change the world, if they dezire to. This power if utilized can help in re frameing the view of the world towards india.
But the stereo type thinking and belives have held the country back in every field, even after being well aware of these facts e don’t change ourselvs. The day has come when we are in need. This I the real time to stand firm and rise, to irradicate the corruption and all other social evils prevailing in the country.
Lets create a new india .. developed, bright and incredible india

.   

Sunday, 13 October 2013

THE POVER OF INDIAN WOMAN




हम जानते हैं की हमारा देश भारत विविधताओं से भरा परा है | हर जगह 


अलग अलग तरह की चीजे है जैसे भाषा,रहन-सहन ,खानपान |मगर एक

 बात  पुराने समय से ही सोचने पर मजबुर करता आया है 

"महिला",यानी 

घर की देवी | हमारा मर्द संचालित समाज उन्हें बस घर तक ही सीमित 

करता आया है |


वे  तो अपने अधिकार का उपयोग से भी हमेसा  वंचीत रही है |


लेकिन समय के साथ बदलाव आता जा रहा है | आज वे अपने अधिकार 

 को समझ रही है |मगर हाल के दिनों में जीस तरह के घटना घटी है वे 

हमारे अंतरात्मा को झकझोर दिया |


कहने को तो हमारा देश आज बहुत ताकतवर बन गया है, मगर इसी देश 

में आज कही पे भरी बाजार में किसी दामनी का  इज्जत लुट लिया 

जाता 

है तो कही पर कोइ  दामनी चंद पैसों के लिये अपना  इज्जत बेच रही है 

,हद तो तब होती है जब कोइ बालिका में ही बधू बन जाती है तो किसी  


को दहेज़ के किये प्रतारित किया जाता है|

मन में बार -बार यह सबाल उठता है कि आखिर इन सब क उपाय क्या है ?

मेरा एक ही उत्तर है रजनीति में भागीदारी , ताकी वे अपना आवाज 

बुलंद कर सके |



बरे ही सर्म की बात है  हमारे देश में महिलाओं की  राजनिती में 

भागीदारी आधे से भी कम है | भले ही सोनिया गाँधी ने अपना मिसाल 


कायम किया हो ,मगर राजनीती में महिलाओं  को बस सोपीस समझा 

जाता है |यही कारन है की उनका आवाज को दावा दिया जाता है |साथ ही 


साथ मीडियाकर्मियों को भी किसि महिला पर हो रहे अत्याचार को 

मसाला  लगा कर पेस नही करना चाहिये|

अंत: महिलाओं को अपनी ताकत को पहचानना चाहिये और अपने देश 

के विकाश में योगदन देना चहिये |