Sunday, 10 November 2013

समाज का निर्माण


आज पुरा संसार आपसी खिचड़ी में फसा हुआ है | हर जगह कोहराम मचा हुआ है | हर जगह बुरा हो रहा है ,लगता है संसार से सुख नाम का शब्द ही     मिट गया हो | कहने के लिये तो दुनियां में  आज  हर तरह के    सुविधाएं
व्याप्त है मगर सच्चाई कुछ और ही है | अरब से लेकर अफगान तक ,कश्मीर से लेकर बिहार तक हर जगह त्राहिमाम मचा हुआ है |लोगों के मन में भय का वातावरण बना हुआ है ,जो  आगें चल कर घातक हो सकता है | लोगों का कुटुम्भ है नस्ट      होने  के कगार पर है | लोग  अपनों को खोते ज रहे हैं साथ ही साथ इस दुनियां से अपनापन  भी धीरे -धीरे ख़त्म होते जा रहा है |कुछ दरिंदे  चंद पैसों के   लिये अपना ईमान तक बेच रहे हैं |

जो भी हो इन  सब के पीछे घिनौने रजनीति है | चाहे जो भी देश हो या जो भी राज्य हो हर जगह आज    विकृत राजनीति हो रहा है |    कुछ राजनीतिक घराने अपने फायदे के लिये इस प्यारे धरती      को                       लहूलुहान कर रहे हैं | इन सब से बचारे आम जनता को तकलीफ उठाना     पर रहा है |

अगर  युवा चाहे तो आज अच्छा समाज का  निर्माण कर सकते हैं | ऐसा समाज    जिसमे बस अमन ,चैन ,शुख -शांति ,सादगी के अलावा   कुछ   नहीं हो | हर ओर बस प्यार ही प्यार हो , हर धर्म का सम्मान हो | लोगों के मन में सच्चाई की ललिमा चहक उठे | देखने में हमारा दुनियां जन्नत से भी प्यारा लगे |

   



  

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