Wednesday, 30 October 2013

भारतीय संस्कृति में अमेरिकी राजनीति

 हम जानते है की भारत के महान संस्कृति ने  पूरी दुनिया को मार्ग दिखाया है |  इसी कारण वश प्राचीन समय से ही दुनिया वाले इस विषय के बारे में आन्तरिक ज्ञान सम्र्हित करने की कोशिश करते रहे है|इतना  ही नही इस विषय पर कई बार शोध भी हो चुके   हैं परन्तु सम्पूर्ण सफलता हाथ नही आया |इसी  क्रम में  अमेरिका में लगभग २० सालों से  चल रहे  हिन्दू धर्म तथा  भारतीय संस्कृति के उपर  शोध      अब पूरा हुआ |  इसे विश्वकोष का रूप दे दिया गया| और नाम रखा गया हन्दू धर्म विश्वकोष |दुनियां भर के लगभग १००० विद्वानों तथा  अनुसंधान कर्ताओ के समस्त प्रयास से हन्दू धर्म विश्वकोष तैयार हुआ |यह विसलकाय विश्वकोष ११ खड़ो तथा सात हजार प्रविष्टियों में उद्धृत है| इसे इंडियन हेरिटेज रिसर्च phaunddesan द्वारा प्रकाशित कराया गया  है|स्वामी चिदानंद सरस्वती ने काफी सहयोग दिया|सम्पादक का कार्य डा .के एल शेष गिरी राव ने किया |
भले ही नामकरण हिन्दू धर्म की और इसारा करता हो मगर इससे  हर धर्म का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है|इसमे भारत की महान आध्यात्मिक संस्कृति के  स्वरूप का वर्णन   किया गया है|ये  महज  विश्वकोष के सीमांकन मात्र नही है बल्कि हमारे लाखों वषों  पूर्व के इतिहास के बारे में बतलाता है|अर्थात हम अपने कला-संस्कृति,नाट्यकला ,रजनीति ,दर्शन का ज्ञान पाप्त कर सकेगे |इसमे भारतीय प्राचीन परम्पराएं भी समाहित है|समस्त मनुष्य के रहन –सहन, विचार-व्यवहार  के बारे में भी   जानकारी प्राप्त की जा सकती है |यानि प्राचीन समय के विशुद्ध  प्रमाणिक संग्रह का सारतत्व है|
हालांकि शरु से भारतीय संस्कृति दुनियां  में  शान्ति   की अस्थापना का पुर जोर कोशिश करता रहा है | मगर दुनिया में तांडव का अंकुरण सहस्त्र साल पहले ही शुरू होगाया था |अपने शर्मशिल्ता से भागने वाले लोग हमेशा  से इस अंकुरण को कटुता रूपी जल से सीचते आये  है |आज हम विध्न्सता की ओर चक्र के तरह बढ़ रहे हैं जो विश्वव्यापी    संघर्ष  पैदा कर सकता है|इसके कारन सही है क्योकि हमारे  पास संस्कृति तथा सभ्यता का संगृहीत ज्ञान नही था |लेकिन अब हम हिन्दू धर्म विश्वकोष के माद्यम से अपने आप को -अपने संस्कृति को भली भांति  समझ सकते है फलस्वरूप दुनियां के अटल फलक पर विज्ञानसम्मत व्यापक सत्यापन  दिखेगा|
मगर कुछ बातें  सोचने पर बजगुर करता है की आखिर ये सारा काम विदेश में क्यों पूर्ण हुआ ?
जबकी हमारे भारत देश के पास हर तरह का अत्याधुनिक संसाधन मौजुद है जो  शोध  के लिए मिल का पत्थर बन सकता है | वहीं हिन्दू धर्म से जुरी हर तरह ज्ञान का   उल्लेख  भी प्राप्त हो जाता |मगर शोध का  काम यहाँ से कोशों दूर अमेरिका में क्यों हो रहा था ,भारत में क्यों नही ? क्या भारत में धन की कमी है या बात कुछ और है जरुर कुछ और बात है  , क्योंकी हम जानते हैं भारत दुनियां  का सबसे  ज्यादा उभरता हुआ बाजार है | अमेरिका का इस पर नजर है और वह दुसरे देश को आगे नही बढ़ने देते |यानी वह भारत में पाव ज़माने के लिए कुछ भी कर सकता है |यही कारन है कि अमेरिका यहाँ के सभ्यता और संस्कृति में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है ताकी यहां के   राजनीतिक व्यवस्था में वे  (अमेरिका ) हस्तक्षेप कर सके और अपना फायदा निकाल सके |
हमें इसका विरोध करना होगा


Monday, 28 October 2013

YOUNG INDIA




We know that  even after so many years india still lies in it’s decade old civilization and their system. India as known through out the world is still bounded with old regulations and traditions. Like, donating all your hard earn money and gold into temples, black magic, wizcraft, and many others included. And these are the main factors that resist the development of the country , directly or ultimately.
The potential of this country lies in the youth, the youth that I hard working and full of zeal. They can change the world, if they dezire to. This power if utilized can help in re frameing the view of the world towards india.
But the stereo type thinking and belives have held the country back in every field, even after being well aware of these facts e don’t change ourselvs. The day has come when we are in need. This I the real time to stand firm and rise, to irradicate the corruption and all other social evils prevailing in the country.
Lets create a new india .. developed, bright and incredible india

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Sunday, 13 October 2013

THE POVER OF INDIAN WOMAN




हम जानते हैं की हमारा देश भारत विविधताओं से भरा परा है | हर जगह 


अलग अलग तरह की चीजे है जैसे भाषा,रहन-सहन ,खानपान |मगर एक

 बात  पुराने समय से ही सोचने पर मजबुर करता आया है 

"महिला",यानी 

घर की देवी | हमारा मर्द संचालित समाज उन्हें बस घर तक ही सीमित 

करता आया है |


वे  तो अपने अधिकार का उपयोग से भी हमेसा  वंचीत रही है |


लेकिन समय के साथ बदलाव आता जा रहा है | आज वे अपने अधिकार 

 को समझ रही है |मगर हाल के दिनों में जीस तरह के घटना घटी है वे 

हमारे अंतरात्मा को झकझोर दिया |


कहने को तो हमारा देश आज बहुत ताकतवर बन गया है, मगर इसी देश 

में आज कही पे भरी बाजार में किसी दामनी का  इज्जत लुट लिया 

जाता 

है तो कही पर कोइ  दामनी चंद पैसों के लिये अपना  इज्जत बेच रही है 

,हद तो तब होती है जब कोइ बालिका में ही बधू बन जाती है तो किसी  


को दहेज़ के किये प्रतारित किया जाता है|

मन में बार -बार यह सबाल उठता है कि आखिर इन सब क उपाय क्या है ?

मेरा एक ही उत्तर है रजनीति में भागीदारी , ताकी वे अपना आवाज 

बुलंद कर सके |



बरे ही सर्म की बात है  हमारे देश में महिलाओं की  राजनिती में 

भागीदारी आधे से भी कम है | भले ही सोनिया गाँधी ने अपना मिसाल 


कायम किया हो ,मगर राजनीती में महिलाओं  को बस सोपीस समझा 

जाता है |यही कारन है की उनका आवाज को दावा दिया जाता है |साथ ही 


साथ मीडियाकर्मियों को भी किसि महिला पर हो रहे अत्याचार को 

मसाला  लगा कर पेस नही करना चाहिये|

अंत: महिलाओं को अपनी ताकत को पहचानना चाहिये और अपने देश 

के विकाश में योगदन देना चहिये |