बात उस समय कि है जब मैं १२ वीं क्लास में पढता था | पुरे मस्ती के
साथ समय गुजर रहा था | मुझे लगता था कि संसार बस इतना सा ही है |
जो मन में आता वही करता था | बस अपने धुन में लगा रहता था |किसी
फिकरमंद आदमी से बिल्कुल परे ,सोच रहीत तथा ज़माने से दूर |
साधारण सब्दों में कहे ठंढे छाव के तरह था हमारा जीवन |
हम बहुत मेहनत कर रहे थे अपने सपने को पुरा करने के लिये | बस अपने
देश को हर चीज में आगें देखना चाहते | खास कर क्रिकेट को अपना धर्म
समझते थे | जिस दिन मैच होता था उसके पहले रात में ठीक ढंग सो नहीं
पाते थे | हर समय लगा रहता था पता नहीं कल क्या होगा कौन जीतेगा ,
धोनी का सतक लगेगा या नहीं | इस चक्कर में कइ बार माँ से डाट भी
परता |
वहीं राजनीतिक जैसे चीजे उस समय हमारे समझ में नही आता था |
बेरोजगारी , महगाई,भ्रष्टाचार जैसे शब्दों से कुछ मतलब नही था |
एक बार कि बात है ,१५ अगस्त नजदीक था मैं अपने दोस्तों के साथ एक
दुकान पर कुछ खरीद रहा था | तभी मेरा नजर एक ओर जा कर टिक गया |
एक बच्चा जो सकल से गरीब नजर अता था पता नहीं क्यों उसे मैं बार-
बार देखे जा रहा था | मेरा पलक उसे बार - बार निहारे जा था | मैं बिल्कुल
हैरान परेसान था | वह बच्चा धीरे - धीरे हमारे ओर ही चले आ रहा था |
भले ही वो मैले कुचले कपरे पहने हो मगर उसके शरीर से एक अलग ही
तरह का उर्जा निकल रहा था | उसके ललाट से एक तेज निकल रहा था जो
मुझे बार-बार उसको देखने पर मजबुर कर रहा था | वह धीरे - धीरे कर के
मेरे पास पहुँच गया और अपने मैले कपड़े से १० का घिसा सा नोट निकला
और दुकानदार से तिरंगा मागां मगर दुकानदार ने झल्लाते हुए कहा ,
इतने कम पैसों में तिरंगा कहां से होग बेटा और पैसा लाओ ?
यह बात सुनते ही बेचारा बहुत उदास हो गया और रोने लगा | यह सब देख
कर मुझे बहुत बुरा लगा | तत्काल मैने अपने कुछ पैसे मिला कर उसे
तिरंगा तो खरीद दिया मगर मुझे कुछ बातें सोचने पर मजबुर कर दिया -
जैसे कि हमारे देश में इतना गरीबी क्यों है ?
बरोजगारी क्यों नहीं कम हो रहा है ?
महगाई क्यों बढ़ते जा रहा है ?
क्या इन सब चीजों से हमारे देश को निजात मिलेगा ?
जरुर मिलेगा जब हब सब मिल कर इसके खिलाफ काम करें |

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