हम जानते है की भारत के महान संस्कृति ने पूरी दुनिया को मार्ग दिखाया है
| इसी कारण वश प्राचीन समय से
ही दुनिया वाले इस विषय के बारे में आन्तरिक ज्ञान सम्र्हित करने की कोशिश करते रहे
है|इतना ही नही इस विषय
पर कई बार शोध भी हो चुके हैं परन्तु सम्पूर्ण
सफलता हाथ नही आया |इसी क्रम में अमेरिका में लगभग २० सालों से चल रहे
हिन्दू धर्म तथा भारतीय
संस्कृति के उपर शोध अब पूरा हुआ | इसे विश्वकोष का रूप दे दिया गया|
और नाम रखा गया हन्दू धर्म विश्वकोष |दुनियां भर
के लगभग १००० विद्वानों तथा अनुसंधान कर्ताओ
के समस्त प्रयास से हन्दू धर्म विश्वकोष तैयार हुआ |यह विसलकाय
विश्वकोष ११ खड़ो तथा सात हजार प्रविष्टियों में उद्धृत है| इसे
इंडियन हेरिटेज रिसर्च phaunddesan द्वारा प्रकाशित कराया गया है|स्वामी चिदानंद सरस्वती
ने काफी सहयोग दिया|सम्पादक का कार्य डा .के एल शेष गिरी राव
ने किया |
भले ही नामकरण हिन्दू धर्म की और इसारा करता
हो मगर इससे हर धर्म का ज्ञान प्राप्त किया
जा सकता है|इसमे भारत की महान आध्यात्मिक संस्कृति के स्वरूप का वर्णन किया गया है|ये महज विश्वकोष
के सीमांकन मात्र नही है बल्कि हमारे लाखों वषों
पूर्व के इतिहास के बारे में बतलाता है|अर्थात हम अपने
कला-संस्कृति,नाट्यकला
,रजनीति ,दर्शन का ज्ञान पाप्त कर सकेगे
|इसमे भारतीय प्राचीन परम्पराएं भी समाहित है|समस्त
मनुष्य के रहन –सहन, विचार-व्यवहार के बारे
में भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है
|यानि प्राचीन समय के विशुद्ध प्रमाणिक संग्रह का सारतत्व है|
हालांकि शरु से भारतीय संस्कृति
दुनियां में शान्ति
की अस्थापना का पुर जोर कोशिश करता रहा है | मगर
दुनिया में तांडव का अंकुरण सहस्त्र साल पहले ही शुरू होगाया था |अपने शर्मशिल्ता से भागने वाले लोग हमेशा से इस अंकुरण को कटुता रूपी जल से सीचते आये है |आज हम विध्न्सता की ओर
चक्र के तरह बढ़ रहे हैं जो विश्वव्यापी संघर्ष
पैदा कर सकता है|इसके
कारन सही है क्योकि हमारे पास संस्कृति तथा
सभ्यता का संगृहीत ज्ञान नही था |लेकिन अब हम हिन्दू धर्म विश्वकोष
के माद्यम से अपने आप को -अपने संस्कृति को भली भांति समझ सकते है फलस्वरूप दुनियां के अटल फलक पर विज्ञानसम्मत
व्यापक सत्यापन दिखेगा|
मगर कुछ बातें सोचने पर बजगुर करता है की आखिर ये सारा काम
विदेश में क्यों पूर्ण हुआ ?
जबकी हमारे भारत देश के पास हर तरह का
अत्याधुनिक संसाधन मौजुद है जो शोध के लिए मिल का पत्थर बन सकता है | वहीं हिन्दू
धर्म से जुरी हर तरह ज्ञान का उल्लेख भी प्राप्त हो जाता |मगर शोध का काम यहाँ से कोशों दूर अमेरिका में क्यों हो रहा
था ,भारत में क्यों नही ? क्या भारत में धन की कमी है या बात कुछ और है जरुर कुछ और
बात है , क्योंकी हम जानते हैं भारत दुनियां
का सबसे
ज्यादा उभरता हुआ बाजार है | अमेरिका का इस पर नजर है और वह दुसरे देश को
आगे नही बढ़ने देते |यानी वह भारत में पाव ज़माने के लिए कुछ भी कर सकता है |यही
कारन है कि अमेरिका यहाँ के सभ्यता और संस्कृति में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है ताकी
यहां के राजनीतिक व्यवस्था में वे (अमेरिका ) हस्तक्षेप कर सके और अपना फायदा निकाल
सके |
हमें इसका विरोध करना होगा
.jpg)

No comments:
Post a Comment