भारत आज दुनियां में
हर क्षेत्र में अपना दम-खम
रखता है |जहाँ
दुनियां भर में सैन्शक्ति में चौथे स्थान पर है वहीं 11 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है
| आज विकाश के मामले में दुसरे स्थान पर है | हर ओर आज अच्छा कर रहा है हमारा देश
|मगर एक ओर स्थिति जस की तस है अर्थात कहे तो शिक्षा |आज हमारे विधार्थी तो पुरे
दुनियां में परचम लहरा रहे हैं मगर वे विदेशों में जाकर पढने को मजबुर है वहीं
लगभग 40%अभी भी साक्षर नहीं है |वहीं विश्व के 200 अच्छे कालेजों की सूचि में भारत
का एक नही नहीं हैं |देख कर तो यही लगता है शिक्षा अधिकार कानून कागजी ही साबित
होगा|
सीधे तौर पर देखा जाए तो इन सब चीजों
के प्रमुख कारन है सरकारी विधालय में फैले
कुव्यवस्था | हकीकत यह है कि आज भी स्कूलों की दशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं
हो पाया है। बहुत सारे स्कूलों में न पर्याप्त कमरे हैं, न पीने के पानी, शौच, ब्लैकबोर्ड, पाठ्यसामग्री आदि की व्यवस्था।यहां तक
की बहुत सारे राज्यों में अध्यापकों के हजारों पद खाली हैं| इसी क्रम मैं पंजाब एक
गावं चखहकीम गया वहां पर भी कुछ ऐसा ही नजारा मिला देखने को |हालांकी वहां पर
शिक्षकों ने सरकार पर आरोप लगाया |यहां पर दो सरकारी विधालय है मगर दोनों हीं बदहाल
एक प्राथमिक विधालय दूसरा मध्यविधालय | जब
मैं गया तो देख कर दंग रह गया वहां के बच्चे विधालय में पढ़ नही रहे थे बल्की खेल रहे थे | प्राथमिक विधालय में तो बच्चों के
बैठने के लिये खुले आसमान थे |वहीं कुछ बच्चे लगनशील नजर दिखे | वहीं कुछ बच्चे
विधालय के बहार बैठे थे और उसे समझाने वाला कोइ नहीं था |और तो और 12:30 PM में
मध्यानभोजन बनाना ही सुरु हुआ था |वहीं सारे शिक्षक आपस में गप्पे लारा रहे थे|
कुछ बच्चे पानी पिला रहे थे शिक्षकों को जबकि इसके लिये अलग से हर विधालय में
कर्मचारी रखा गया है |वहीं तस्वीर भी उतारने नही दिया गया था |
मगर
यह स्थिति हर जगह की है |वहीं इसके सुधार के उपाय किया जरह है मगर सरकार अभी भी
सोए हुए है | ऐसे
में नेशनल कोलिशन फॉर एजुकेशन नामक संस्था की ओर से दायर याचिका पर सर्वोच्च
न्यायालय ने उचित ही केंद्र और सभी राज्यों से पूछा है कि शिक्षकों की भारी कमी की
सूरत में किस तरह शिक्षा अधिकार कानून का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। बुनियादी
शिक्षा के मामले में सरकारों का रुख छिपा नहीं है। केंद्र ने शिक्षा का अधिकार
कानून लागू तो कर दिया, पर इसके लिए संसाधन जुटाने की चुनौती से सरकारें आंख चुराती रही हैं।दुःख
बात है हमारे देश में अभी तीन करोड़ अस्सी लाख बच्चे स्कूली पढ़ाई से वंचित हैं।अर्थात
हमें इसे बदलना होगा चकहकीम जैसे गांव सुरुआत करना परेगा |

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